🔰 राजस्थान की लोक जीवन शब्दावली 🔰
राजस्थान के ग्रामीण जीवन में प्रयुक्त होने वाली पारंपरिक शब्दावली हमारी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है। ये शब्द न केवल खेती-बाड़ी और पशुपालन से जुड़े हैं, बल्कि जीवन की विविध परिस्थितियों और उपकरणों को भी दर्शाते हैं। आइए जानें ऐसे ही 56 पारंपरिक शब्दों का अर्थ और महत्व।
1. बिजूका – खेत में पशु-पक्षियों से फसल की रक्षा करने के लिए मानव जैसी बनाई गयी आकृति
2. उर्डो – ऐसा खेत जिसमें घास और अनाज दोनों में से कुछ भी पैदा न होता हो
3. अडाव – भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए कुछ समय खाली छोड़ना
4. अखड – बिना जोता हुआ पड़ा खेत
5. पाणत – फसल को पानी देने की प्रक्रिया
6. बावणी – खेत में बीज बोने की प्रक्रिया
7. ढूँगरा – फसल काटने के बाद उसका ढेर
8. बाँझड – अनुपजाऊ भूमि
9. गूणी – बैलों के चलने का ढालनुमा स्थान
10. चरणोत – पशुओं के चरने की भूमि
11. बीड – अनुपयोगी भूमि जहाँ केवल घास उगती है
12. सड़ो – खेत की मेड जो पशुओं को रोकने हेतु बनाई जाती है
13. गोफन – पत्थर फेंकने का डोरी और चमड़े से बना यंत्र
14. तंगड-पट्टियाँ – ऊंट जोतते समय काम आने वाले पट्टे
15. चावर – खेत समतल करने का लकड़ी का तख्ता
16. जावण – दही जमाने के लिए डाली जाने वाली छाछ
17. गुलेल – पक्षियों को उड़ाने का रबड़ युक्त उपकरण
18. ठाण – पशुओं को चारा डालने का लकड़ी/पत्थर का यंत्र
19. खेली – पशुओं के पानी पीने का कुंड
20. दंताली – खेत की सफाई हेतु उपकरण
...आदि (कुल 56 शब्द)
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